भगवान श्री कृष्ण:भगवान विष्णु के आठवे अवतार

भगवान श्री कृष्ण -भारतीय संस्कृति और पुराणों में भगवान विष्णु के दस अवतारों (दशावतार) का विशेष महत्व है। जब-जब पृथ्वी पर अधर्म का बोझ बढ़ा है, तब-तब भगवान ने धर्म की रक्षा और अधर्म के नाश के लिए अवतार लिया है। इन्हीं अवतारों में सबसे लोकप्रिय, आकर्षक और भक्तिमय अवतार है – श्रीकृष्ण अवतार

भगवान श्री कृष्ण, भगवान कृष्णा , भगवान कृष्णा HD pic, bhagwan krishna

भगवान कृष्ण को केवल विष्णु का अवतार ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण पुरुषोत्तम पुरुष, योगेश्वर, प्रेम और भक्ति के अधिष्ठाता के रूप में भी पूजा जाता है। उनका जीवन और उनकी लीलाएँ मानवता के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।

कृष्ण अवतार का कारण

धर्मग्रंथों के अनुसार जब पृथ्वी पर अत्याचार और अधर्म का भार बढ़ गया, कंस जैसे राक्षसी प्रवृत्ति के राजा प्रजा को सताने लगे और साधु-सज्जन भयभीत रहने लगे, तब धरती माँ ने देवताओं के साथ भगवान विष्णु से प्रार्थना की।

जन्म कथा

श्री कृष्ण का जन्म मथुरा की कारागार में हुआ। उनकी माता देवकी और पिता वासुदेव थे। माता देवकी के भाई कंस को यह भविष्यवाणी मिली थी कि देवकी की आठवीं संतान ही उसकी मृत्यु का कारण बनेगी। भयभीत होकर कंस ने देवकी-वासुदेव को कारागार में डाल दिया और उनकी सात संतानों का वध कर डाला।

जब आठवीं संतान के रूप में भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ, तब श्री कृष्ण की माया से कारागार के द्वार खुल गए और वासुदेव नवजात शिशु को यमुना पार गोकुल में नंद-यशोदा के घर पहुँचा आए। वहीं उनका पालन-पोषण हुआ।
श्रीकृष्ण के बचपन की लीलाएँ सबसे मोहक और आकर्षक मानी जाती हैं।जिनमे बाल्यकाल में श्री कृष्ण का सबसे प्रिय कार्य माखन चुराना था। इसीलिए उन्हें माखनचोर कहा जाता है। यमुना नदी में रहने वाले विषैले नाग कालिया को श्री कृष्ण ने अपने चरणों से दबाकर वश में कर लिया।
देवराज इन्द्र के प्रकोप से गोकुलवासियों को बचाने के लिए श्री कृष्ण ने अपनी छोटी उँगली पर पूरा गोवर्धन पर्वत उठा लिया था। गोपियों के साथ उनका रास केवल नृत्य नहीं था, बल्कि आत्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक था।

युवावस्था और मथुरा गमन

युवा होने पर श्री कृष्ण ने मथुरा जाकर अपने मामा कंस का वध किया और अपने माता-पिता और सभी मथुरा वासियो को उसके अत्याचार से मुक्त कराया। इसके बाद वे धर्म की स्थापना और समाज में न्याय स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयत्नशील रहे।

महाभारत और कृष्ण

महाभारत में कृष्ण की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने अर्जुन के सारथी और मार्गदर्शक बनकर धर्मयुद्ध में पाण्डवों को विजय दिलाई। युद्ध के मैदान में अर्जुन के मोह और विषाद को दूर करने के लिए उन्होंने जो उपदेश दिए, वही आज श्रीमद्भगवद्गीता के रूप में हमें प्राप्त हैं।
गीता में उन्होंने जीवन के गहन रहस्यों को सरल शब्दों में बताया –
• निष्काम कर्म का सिद्धांत
• आत्मा की अमरता
• धर्म पालन का महत्व
• भक्तियोग, ज्ञानयोग और कर्मयोग का मार्ग

भगवान श्री कृष्ण, भगवान कृष्णा , भगवान कृष्णा HD pic, bhagwan krishna

भगवान कृष्ण के शिक्षाप्रद संदेश

1. कर्म ही धर्म है – फल की चिंता किए बिना अपने कर्म करते रहना ही जीवन का सत्य है।
2. भक्ति का महत्व – सच्ची भक्ति से परमात्मा को पाया जा सकता है।
3. धर्म की रक्षा – अन्याय का विरोध और सत्य का साथ देना ही वास्तविक धर्म है।
4. जीवन का उत्सव – कृष्ण ने जीवन को आनंद, संगीत और प्रेम से भरपूर जीने का संदेश दिया।

कृष्ण और भक्तिभाव

भारत में भक्ति आंदोलन का सबसे बड़ा आधार भगवान कृष्ण ही बने। सूरदास, मीराबाई, रसखान, विद्यापति जैसे भक्त कवियों ने कृष्ण के प्रेम और भक्ति को अपनी वाणी से अमर कर दिया।गोपियों की कृष्ण के प्रति प्रगाढ़ भक्ति आत्मा की परमात्मा के प्रति तड़प और मिलन की लालसा का प्रतीक है।

आज के युग में जब समाज में अशांति, अन्याय और भौतिकवाद बढ़ रहा है, तब कृष्ण की शिक्षाएँ पहले से भी अधिक प्रासंगिक हैं।
• गीता का “कर्मयोग” हमें निष्काम सेवा की प्रेरणा देता है।
• उनका “प्रेम और भक्ति का मार्ग” समाज में भाईचारे और शांति की स्थापना करता है।
• उनका “धर्म रक्षा का संकल्प” हमें अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की शक्ति देता है।

भगवान विष्णु का कृष्ण अवतार केवल एक ऐतिहासिक या धार्मिक घटना नहीं है, बल्कि यह सम्पूर्ण मानवता के लिए एक प्रकाशस्तम्भ है। श्रीकृष्ण का जीवन प्रेम, करुणा, नीति, साहस और आध्यात्मिक ज्ञान से परिपूर्ण है।

वे हमें यह सिखाते हैं कि जीवन चाहे कितना भी कठिन क्यों न हो, धर्म और सत्य के मार्ग पर चलते हुए आनंदमय और सफल जीवन जिया जा सकता है। इस प्रकार, भगवान कृष्ण का अवतार वास्तव में धर्म की विजय और अधर्म के नाश का प्रतीक है।

Leave a Comment

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *